देहरादून शहर में आवारा कुत्तों की देखभाल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। देहरादून नगर निगम ने कुछ सख्त नियम लागू किए हैं, जिनके तहत अगर कोई व्यक्ति निर्धारित भोजन स्थलों के अलावा कहीं और आवारा कुत्तों को खाना खिलाएगा, तो उस पर 5,000 रुपये का भारी जुर्माना लगेगा। इसके अलावा, पालतू जानवरों के मालिकों के लिए भी कई नियम और जुर्माने बनाए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये नियम वाकई आवारा कुत्तों की भलाई के लिए हैं, या ये उन लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं जो इन बेसहारा जानवरों की मदद करते हैं? आइए, इस मामले को और करीब से समझते हैं।
भोजन स्थल: अभी तक सिर्फ़ वादे!नगर निगम ने दावा किया था कि आवारा कुत्तों के लिए खास भोजन स्थल बनाए जाएंगे, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक इनका काम शुरू भी नहीं हुआ है। ऐसे में, जो लोग इन बेसहारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनके सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। अगर वे अपने घर के आसपास या खाली जगहों पर इन कुत्तों को खाना खिलाते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लग सकता है। सवाल उठता है कि जब तक भोजन स्थल तैयार नहीं हो जाते, तब तक लोग इन जानवरों की मदद कैसे करें? कई लोग मानते हैं कि ये नियम उन लोगों को हतोत्साहित कर रहे हैं, जो आवारा कुत्तों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।
5,000 रुपये का जुर्माना: क्या ये जायज़ है?नगर निगम ने 5,000 रुपये का जुर्माना तय किया है, जो आम लोगों के लिए काफी ज्यादा है। आवारा कुत्तों को खाना खिलाना एक नेक काम है, और इसके लिए लोगों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, न कि सजा का डर। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस जुर्माने की राशि को कम करना चाहिए, ताकि लोग बिना किसी डर के इन बेसहारा जानवरों की मदद कर सकें। साथ ही, जब तक भोजन स्थल तैयार नहीं हो जाते, तब तक लोगों को अपने घरों के आसपास खाली जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने की छूट मिलनी चाहिए।
समाज विरोधी तत्वों का आतंकएक और बड़ी समस्या है उन असामाजिक तत्वों की, जो आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों के साथ बदतमीजी और मारपीट करते हैं। यह व्यवहार न सिर्फ़ निंदनीय है, बल्कि यह उन लोगों का हौसला तोड़ता है जो इन जानवरों की मदद करते हैं। इससे समाज में नकारात्मक माहौल भी बन रहा है। नगर निगम से मांग है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त नियम बनाए जाएं और उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो।
आवारा कुत्तों का हक़यह धरती हम सबकी है, और इसमें आवारा कुत्तों को भी जीने का पूरा हक़ है। कुछ लोग इन बेसहारा जानवरों को खाना खिलाते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें प्यार देते हैं। ऐसे लोगों का सम्मान होना चाहिए, न कि उन्हें जुर्माने का डर दिखाया जाना चाहिए। नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इन नियमों पर दोबारा विचार करना चाहिए। साथ ही, जब तक भोजन स्थल तैयार नहीं हो जाते, तब तक लोगों को अपने घरों के आसपास इन कुत्तों को खाना खिलाने की इजाज़त दी जानी चाहिए।
अब क्या होगा?पशु प्रेमियों ने देहरादून नगर निगम से अपील की है कि इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए। आवारा कुत्तों की देखभाल करने वालों को प्रोत्साहित करने और समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है। यह समय है कि हम सब मिलकर इन बेसहारा जानवरों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित माहौल बनाएं।
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