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भारत-अमेरिका ट्रेड डील को झटका, फिलहाल टल सकती है ट्रंप टीम की भारत यात्रा

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement – BTA) एक बार फिर अटकता दिख रहा है। 25 अगस्त से शुरू होने वाली वार्ता को लेकर अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा को आगे की तारीख तक स्थगित किया जा सकता है। अब तक पांच राउंड की वार्ता पूरी हो चुकी है और छठे दौर की बातचीत 25 से 29 अगस्त के बीच भारत में होनी थी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यह संभावना प्रबल है कि अमेरिकी टीम का शेड्यूल रीशेड्यूल किया जाएगा। बैठक के स्थगित होने को लेकर कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह घटनाक्रम उस वक्त और अहम हो जाता है जब अमेरिका ने भारतीय निर्यातित वस्तुओं पर 50% तक का भारी शुल्क लगाने का ऐलान किया है।


पुतिन-ट्रंप मुलाकात का पड़ रहा है असर?

अमेरिकी टीम की भारत यात्रा टलने की खबर ठीक उसी समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अलास्का में मुलाकात की। हालांकि यह बैठक युद्ध को लेकर किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। पुतिन ने मास्को में अगली मीटिंग के लिए ट्रंप को न्योता दिया, जबकि ट्रंप ने क्रमिक युद्धविराम की बजाय सीधे शांति वार्ता का पक्ष लिया।


जानकारों का मानना है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा व रक्षा संबंध अमेरिका की चिंता का बड़ा कारण बने हुए हैं। यही वजह है कि पहले से चल रहे टैरिफ विवाद में और तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका लगातार इस मुद्दे को व्यापार वार्ताओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

भारत पर ट्रंप के 50% टैरिफ का मतलब क्या है?

ट्रंप प्रशासन ने भारत से अमेरिका पहुंचने वाले उत्पादों पर 50% तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है। इस भारी-भरकम टैक्स को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहली किस्त के तहत 25% शुल्क 7 अगस्त से लागू हो चुका है और दूसरी किस्त 27 अगस्त से लागू होगी। अमेरिका का तर्क है कि रूस से भारत द्वारा कच्चा तेल खरीदने की वजह से यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

रिपोर्टों की मानें तो अमेरिका भारत से कृषि और डेयरी क्षेत्र के बाजारों को अपने लिए खोलने का दबाव बना रहा है। ये ऐसे सेक्टर हैं जिनसे सीधे तौर पर छोटे और सीमांत किसान जुड़े हुए हैं। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अगर इन क्षेत्रों में समझौता किया गया तो लाखों किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। यही कारण है कि नई दिल्ली इन मामलों में अब तक बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।

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