राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को बहाल करने से जुड़ा मामला फिलहाल टल गया है। शुक्रवार (29 अगस्त) को इस मामले पर बहस होनी थी, लेकिन निर्धारित समय पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। पहले यह सुनवाई जस्टिस समीर जैन के पास सूचीबद्ध थी। उनकी अनुपस्थिति के चलते मामला जस्टिस अनूप कुमार ढांड के समक्ष आया। उन्होंने अगली तारीख 3 सितंबर तय कर दी।
सरकार ने रोक के लिए गिनाई वजहें
इस याचिका की पैरवी छात्र जय राव की ओर से वकील शांतनु पारीक कर रहे हैं। दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने अपने लिखित जवाब में चुनाव रोकने के औचित्य को लेकर दलीलें दीं। सरकार ने कहा कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इस समय चुनाव करवाना संभव नहीं है।
याचिकाकर्ता की आपत्ति: "2022 में चुनाव हुए तो अब क्यों नहीं?"
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नई शिक्षा नीति वर्ष 2020 से लागू है। इसके बावजूद 2022 में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए गए थे। ऐसे में इस बार रोक लगाने का तर्क अनुचित है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत 90 दिन की कक्षाएं पूरी होनी चाहिएं। इस पर याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर सत्र पीछे चला गया है, तो उसकी जिम्मेदारी छात्रों पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई पर है।
राज्य सरकार को देनी होंगी 10 आपत्तियों पर सफाई
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में रिजॉइंडर भी दाखिल किया गया है, जिसमें सरकार के जवाबों पर कुल 10 बिंदुओं में आपत्तियां दर्ज की गई हैं। अब अदालत ने जब नई तारीख दी है, तो सरकार को इन सभी आपत्तियों पर लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा।
You may also like
गुरुग्राम : ईडी ने बीपीटीपी लिमिटेड के खिलाफ फेमा उल्लंघन मामले में कसा शिकंजा
जरूरी नहीं हर मुद्दे का समाधान आंदोलन से हो, बातचीत है अच्छा विकल्प : मुफ्ती वजाहत कासमी
'द बंगाल फाइल्स' स्टार अनुभा अरोड़ा ने की विवेक रंजन की तारीफ, बताया कैसे की अपने किरदार की तैयारी
गुजरात में गणेशोत्सव के बीच गरबा की तैयारियां, 'बाबा वेंगा' अंबालाल पटेल ने की टेंशन बढ़ाने वाली भविष्यवाणी
चाय पीना आदत नहीं, शरीर के लिए रोज़ का जहर है! राजीव दीक्षित जी के आयुर्वेदिक विचार पर आधारित..`